Tag Archive | Hindi blog by Dhakad Amit

मैं उस कर्म की बात करूँगा… (मुक्तक)

न जात की बात करूँगा, न धर्म की बात करूँगा ।
न गर्व की बात करूँगा, न शर्म की बात करूँगा॥
इंसान होने का वो महान फर्ज बस तुम अदा कर दो,
ला दे जो दुनिया में खुशी, मैं उस कर्म की बात करूँगा ॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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बाल विवाह पर नारे (Slogans on Child marriage)

1.​बच्चों को पढ़ाने की लो राह, बंद करो ये बाल विवाह।

Slogans on Child marriage(Bal vivah) 2.पढ़ने खेलने की उम्र है, बाल विवाह जुर्म है।

Slogans on Child marriage(Bal vivah) 3.क्यों दी बच्चों को सजा, बाल विवाह से लो बचा।

Slogans on Child marriage(Bal vivah)

रचनाकार – अमित चन्द्रवंशी

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नवोदय चालीसा

॥श्री गणेशाय नमः॥

दोहे:

सपना था राजीव का, बने एक संस्थान।
प्रतिभावान छात्रजन, पायें जिसमें ज्ञान॥1॥
शिक्षा पायें यहाँ पर, गुणी बालक गरीब।
बच्चें रक्षा कर सकें, बन भारत की नींव ॥2॥

चौपाई :

हर बच्चा शिक्षित जब होगा।
भारत विकसित तब ही होगा॥1॥
भारत तब नवोदय करेगा ।
जब हर ईक बच्चा पढ़ेगा ॥2॥

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दहेज प्रथा पर नारे ( Slogans on Dowry System)

​1.जब तक रहेगी दहेज प्रथा, बेटी रहेगी दुखी सदा।

2.बेटी कोई वस्तु नहीं, दहेज से जो बिक रही।

3.शादी तो एक बहाना है, दहेज लेकर आना है।

4.अनमोल से भी अनमोल है बेटी, फिर उसे दहेज से क्यों बेची।

5.दहेज प्रथा ने जुल्म किया, बेटी को बोझ बना दिया।

रचनाकार – अमित चन्द्रवंशी

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वानर जाति भी हुई महान…

हनुमानजी के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है, पर कुछ इतनी विशेष बातें हमें सीखने को मिलती हैं।जो हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं और हमारे आत्मविश्वास को सदैव बनाए रखती हैं । 
हनुमानजी ने वानर रूप में जन्म लिया था और उस वानर को नीच जाति का प्राणी माना गया है जैसा तुलसीदास जी ने भी एक चौपाई के द्वारा बताया है कि-

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एक आदर्श समाज

​व्यक्तियों के समूह को मिलाकर एक परिवार बनता है और उन परिवारों से मिलकर एक समाज बनता है और उन समाजों से मिलकर एक राज्य बनता है और उन राज्यों के मिलने से एक राष्ट्र बनता है और उन राष्ट्रों के मिलने से एक विश्व का निर्माण होता है।
समाज उन व्यक्तियों के समूह को दर्शाता है जो एक साथ रहते हैं अर्थात् समाज को यदि परिभाषित करने की कोशिश की जाए तो इससे यह आशय निकलेगा कि एक दल या समुदाय जो किसी विशेष स्थान पर रहता है (एक स्थान पर रहने वाले लोगों का वर्ग या समुदाय है) और अपने आप में एक संस्कृति को संजोये रखता है।

समाज तो वो एक माला है जिसके परिवार रूपी मनोहर मोती हैं और परिवार के सदस्य उस मोती की सुंदरता है।

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शिवद्रोही राम जी का सेवक नहीं हो सकता (भगवान को लेकर लड़ाई क्यों???)

आज संसार में सभी अपने धर्म को श्रेष्ठ बताने से पीछे नहीं हटते और इसी वजह से कई लड़ाईयाँ हुईं हैं ।
 यदि आपको सभी धर्मों को भी छोड़ दो तो अकेले सनातन धर्म में ही इतने भगवान और देवी-देवता हैं कि लोगों ने अपनी श्रद्धानुसार किन्हीं भगवान को मन ही मन अपना ईष्ट मान लिया है और जब भी सनातन धर्मियों में भगवान की बात छिड़ती है तो वो अपने ईष्ट देव को बड़ा बताने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते हैं ।
 तब बात यही होती है कि कौनसे भगवान श्रेष्ठ  (बड़े) हैं ? और यह श्रेष्ठता का फेर ही लड़ाई का कारण बन जाता है ।

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