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मैं उस कर्म की बात करूँगा… (मुक्तक)

न जात की बात करूँगा, न धर्म की बात करूँगा ।
न गर्व की बात करूँगा, न शर्म की बात करूँगा॥
इंसान होने का वो महान फर्ज बस तुम अदा कर दो,
ला दे जो दुनिया में खुशी, मैं उस कर्म की बात करूँगा ॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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एक आदर्श समाज

​व्यक्तियों के समूह को मिलाकर एक परिवार बनता है और उन परिवारों से मिलकर एक समाज बनता है और उन समाजों से मिलकर एक राज्य बनता है और उन राज्यों के मिलने से एक राष्ट्र बनता है और उन राष्ट्रों के मिलने से एक विश्व का निर्माण होता है।
समाज उन व्यक्तियों के समूह को दर्शाता है जो एक साथ रहते हैं अर्थात् समाज को यदि परिभाषित करने की कोशिश की जाए तो इससे यह आशय निकलेगा कि एक दल या समुदाय जो किसी विशेष स्थान पर रहता है (एक स्थान पर रहने वाले लोगों का वर्ग या समुदाय है) और अपने आप में एक संस्कृति को संजोये रखता है।

समाज तो वो एक माला है जिसके परिवार रूपी मनोहर मोती हैं और परिवार के सदस्य उस मोती की सुंदरता है।

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गुरु (दोहा)

धाकड़ अमित दोहा :

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गुरु बिन ज्ञान शून्य जगत,गुरु विश्व ज्ञानखान।
असंभव से संभव सब, पाया जो गुरु ज्ञान॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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