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वानर जाति भी हुई महान…

हनुमानजी के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है, पर कुछ इतनी विशेष बातें हमें सीखने को मिलती हैं।जो हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं और हमारे आत्मविश्वास को सदैव बनाए रखती हैं । 
हनुमानजी ने वानर रूप में जन्म लिया था और उस वानर को नीच जाति का प्राणी माना गया है जैसा तुलसीदास जी ने भी एक चौपाई के द्वारा बताया है कि-

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कौनसा काम कठिन है… (लेख)

Hanuman Ji - The great power

कवन सो काज कठिन जग माहीं। 
जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
(अर्थात् जगत में ऐसा कौनसा कठिन काम है। जो हे! तात तुमसे न हो सके।)(रामचरितमानस 4.30.4) 

इस चौपाई का अर्थ बड़ा गहरा है यदि इसे आपने जान लिया तो सच मानिये। आप के लिए कोई भी कार्य करना कठिन नहीं होगा। पर आप कहोगे ये बात तो हनुमानजी के लिए कही गई है और वो तो बड़े शक्तिशाली थे और उन्हें भिन्न भिन्न देवताओं से भिन्न भिन्न शक्तियाँ वरदान स्वरूप मिली हैं। तो उनके लिए कुछ भी करना असंभव नहीं है।

पर एक बात आप भूल रहे हो कि यह बात उन सामान्य हनुमानजी से जामवंत जी द्वारा कही गई थी जो खुद नहीं जानते थे कि उनके पास इतनी असीमित शक्तियाँ है कि उनके लिए समुद्र लांघना क्या? पूरी लंका को ही यहाँ उठाकर लाने की शक्ति थी। फिर अकेले समुद्र पार करने की बात ही छोड़ दो और वो अन्य बातें भी छोड़ दो कि वो अकेले लंका जाकर क्या क्या नहीं कर सकते।खैर, यह सब आपको पता ही है।

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क्यों करूँ मैं आत्महत्या?(कविता)

क्यों करूँ मैं आत्महत्या?
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जब मौत आ ही गई तो क्यों न, दो-दो हाथ हो जायें।
क्या भरोसा मौत घुटने टेके, और विजयी माला पायें॥
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तू एक कदम तो चल…(मुक्तक)

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तू एक कदम तो चल, तेरे साथ कई कदम चलेंगे।
तू एक बार हाथ तो बढ़ा, तेरे लिए कई हाथ बढ़ेंगे॥
खुशी मिलना उतना कठिन नहीं, जितना लोग समझते हैं;
बस ‘अमित‘ मन में हो दृढ़ विश्वास, तो सब सुख मिलेंगे॥

रचयिता अमित चन्द्रवंशी

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क्यों करूँ आत्महत्या? (कविता)

एक मुस्कान (कविता)

एक मुस्कान

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जो काम कर सकती है एक मुस्कान ।
उसका आपको नहीं है जरा सा भी भान॥
एक राजा से लेकर रंक के लिए समान ।
बिन मोल मिले है ये अनमोल मुस्कान ॥ 

मनमोहक निश्छल मीठी है मुस्कान ।
जिस पर तो निर्जीव भी होय कुर्बान ॥

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वक्त(मुक्तक)

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वक्त बर्बाद करने की ‘अमित‘ ने आदत नहीं बनाई।
और वक्त बर्बाद करने की वक्त से मोहलत भी नहीं पाई॥
जो एक बार वक्त बर्बाद हुआ ‘अमित‘ कभी भूल से,
तो वक्त ने भी फिर कहाँ बर्बाद करने में देर लगाई॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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जो शूल बन गये हैं…(मुक्तक)

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जो शूल बन गये हैं अब, उन्हें फूल बना दीजिए।
और जो फूल थे अब तक, उन्हें शूल बना दीजिए॥
कब तक बेबस रहकर ‘अमित‘, प्यासा रहेगा पपीहा;
जो अब रोब कोई जमाये, उसे धूल बना दीजिए॥

रचयिताअमित चन्द्रवंशी