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योग पर मुक्तक

बिन खर्चे एक रुपिया ।
कह दो तुम शुक्रिया ॥
योग से मिटे सब रोग,
तो तू क्यों न कर रिया॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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दहेज  (कविता)

​जबसे पैदा होती है बेटी, तो एक ही बात होती है जमाने में;
एक बाप लग जाता है तब से दिन रात कमाने में।
कि जैसे भी हो पर दहेज तो कैसे न कैसे जुटाना है;
और अपनी प्यारी बिटिया को उस दहेज से विदा कराना है।

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योग पर नारे (Slogans on Yoga)

1.जो चाहते हो तुम रोगों से छुटकारा।
तो लो नियमित योग का सहारा॥

2.योग है स्वस्थ जीवन पहचान।
नियमित योग से रोग निदान ॥

3.जब भी मिले मौका कर लो योग।
फिर देखो कैसे भागे रोग॥

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