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दोस्ती (कविता)

दोस्ती ही तो है जो जिंदगी के एक रंग में भी कई रंग दिखाती है।
वरना बिना दोस्तों के रंगीन जिंदगी भी बेरंग सी नजर आती है॥

सच्ची दोस्ती से बढ़कर इस दुनिया में कुछ कहाँ है।
एक भी दोस्त अगर सच्चा है तो अपना सारा जहाँ है॥

जो दोस्त साथ हो तो डर किस उड़ती चिड़िया का नाम है।
मस्त मस्ती में बस हर दम खिलखिलाने का तब काम है॥

जब हो कोई tension या किसी problem से हों परेशान ।
तब दोस्त के साथ होने से ही उनका हो जाता है समाधान ॥

उनकी नजरें ही कह देती हैं चल यार इसे भी देख लेते हैं ।
और किसी भी पल में यूँ ही मुस्कुराने की हिम्मत दे देते हैं ॥

दोस्तों का झूठा दिलासा ही शरीर में जान डालता है।
और चेहरा घोर उदासी में भी खिलखिला कर मुस्कुरा पड़ता है॥

दोस्त ही तो हैं जो बिना कुछ बोले सब जान लेते हैं ।
और हर expressions को दूर से ही भाँप लेते हैं॥

दोस्तों के साथ मिल कर हर बोझ हल्का हो जाता है।
दोस्तों से मिलकर पल में ही मन को सुकून मिल जाता है॥

दिन भर शरारत करना और रात भर उन पर खिलखिलाना।
और पुरानी बातों का ताजा करके यूँ ही पूरी रात बिताना॥

वो अजब गजब शर्ते और कई कारनामों का बबाला।
वो शरारत की चटनी और शोर शराबे का मसाला॥

वो नोकझोक का होना और कभी किसी से लड़ पड़ना ।
और फिर कई लोगों का मिलकर उसे मनाने में लगना॥

कभी उसे सताना और कभी उसका रूठ जाना।
और फिर उसे मनाना और अपना प्यार जताना॥

वो code words का खेल और यारों का चिढाना।
और अपने यारों के नये नये नामों का बनाना ॥

वो लफड़ों का होना और कई दलों का active होना।
फिर वो गर्मा गर्मी और फिर लड़ाई में किसी को धोना॥

इस तरह ही कई यादों के रंगों को मन में बसाना।
और उन यादों से उदास लम्हों में मन को खूब हर्षाना॥

यही तो हैं दोस्ती की दुनिया के अजब निराले रंग।
मन करे कि मिल जाए दोबारा उस वक्त का संग॥

कि जो गए थे रूठ और जो हो गई थी कुछ गलतियाँ।
जिनसे न हुई थी दोस्ती उनसे बढ़ा लें अब नजदीकियाँ॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

वो नाराज है मुझसे…

आज न जाने कितने बरसों के बाद,
कुछ लिखने का ख्याल आया अकस्मात।
तब मेरे कदम गए उस मेज की ओर,
जहाँ रचनाओं की नित होती थी भोर।
पर जब गया मैं उस मेज पर,
तब वो मेज बोली बड़ी चिढ़कर।
हम रोज तिल तिल कर अपमानित होते रहे हैं,
और तुम्हारी उपेक्षा भरी निगाहों से खोते रहे हैं।
एक बार तो कम से कम हाल पूछ लेते हमारा,
न रोज न महीने में बस एक साल में सारा।

तब लगा मेरे दिल को कि वो नाराज है मुझसे।
इतना कि अब तो बात नहीं हो सकती उससे॥

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आजकल के बच्चे(कविता)

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आजकल के बच्चों को नहीं चाहिए खिलौने।
हो गए हैं वो आजकल बहुत ज्यादा ही सयाने॥

वो बात हुई पुरानी जो बच्चों की जिद थी अनूठी।
अब तो ऐसी-ऐसी जिदे हैं जो न हो सके झूठी॥

पहले कहता था बच्चा चाँद मुझे ला दो।
अब कहता है मुझे iPhone 7 दिला दो॥

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