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हमारी धरती… (कविता)

​धरा वस्त्र थे ये पेड़, जल था आभूषण ।
कर दिया सब खत्म, लाकर ये प्रदूषण॥

धरती की सुंदरता, थी उसकी हरियाली।
छीनी नासमझों ने, पाने क्षणिक खुशहाली॥

अब देखो मौसम बदले, फैलें नई-नई बीमारी।
अब तो संभल जाओ, समझो जिम्मेदारी॥

ऐसे कैसे बने लालची, बढ़ा ली है आफत।
कहाँ गई वो समझदारी, तुमको तो है लानत॥

अपने आने वाले बच्चों को, थोड़ा तो करो प्यार।
पेड़ लगाकर बन जाओ तुम, अब तो समझदार॥

जागरूक होने में ही है, आज सबकी भलाई।
वर्ना बचा न पाओगे, चाहे कितनी हो कमाई॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी 

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दीप दीप दीपावली

श्री रामजी जिस दिन लौटे थे अयोध्या नगरी ।

जनता खुशी से नाच उठी थी उस पल सबरी ॥

नगर-नगर ग्राम-ग्राम हर घर-घर दीप जला ।
खुशी दौर नभ थल जल पाताल धरा स्वर्ग चला॥

उठा हर घर-घर चमक बुराई सारी मिट गई ।
नव रंग अब छाने लगा धरा मंगलमय भई ॥

देव नर मुनि जीव-जड़ सब झूम खूबहि उठही ।
बाल -युवा- वृद्ध -पंछी सब प्रभु गुणगान गावही ॥

तरु -फूल -फल- पानी- शाखा -जड़ प्रभु नाम जपही ।
मधुर स्वर हर कण- कण से पल- पल फूटन लगही ॥

शीतल सुगंधित मंद पवन सुख रस इत-उत बहावहीं।
नभ घन वसन पहन दे शीतलता छाया अति बनावहीं॥

हर घर -घर गली -गली फैले दीप दीप दीपावली ।
रौनकता -चहलता -नवीनता उमंग हवा जगह- जगह चली ॥

आनंदमय -मंगलमय -रसमय पावन वातावरण दिशि- दिशि समाही ।
दिवस कार्तिक मास अमावस्या अमित खुशहाली प्रकाश देत गवाही ॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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दोहे

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धनतेरस मुक्तक

धनतेरस मुक्तकतन   बलिष्ठ   हो  मन  हर्षित  हो ।
सब   मनोंकामनायें  फलित   हो॥
रहे ‘अमित’ यम-धन्वन्तरि आशीष,
खुशी धन दीप सदा प्रज्वलित हो॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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धनतेरस की पूर्ण कथा जानने की लिए यहाँ click करें

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मंगलकर्ता विघ्नहर्ता (दोहा)

Shree Ganesha Doha by Amit Chandrawanshiधाकड़ अमित दोहा :

मंगल करण विघ्न हरण, करें आपका ध्यान ।
प्रथम आरती आपको, हो पूरण वरदान॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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जन्मदिवस शुभकामनाएँ  (Birthday wishes with Poem)

Birthday Poem By Amit Chandrawanshi

Birthday Poem By Amit Chandrawanshi

🎁˙˙˙noʎ oʇ ʎɐpɥʇɹıq ʎddɐɥ🎂

जन्मदिवस शुभ अवसर पर ,
     लो खुशियाँ उपहार में हर ।
आप जियो साल हजार ,
     नाम  हो  आपका  अपार ।
सबके आशीष पाओ सर,
     आपसे दुखी न होय कोई नर।
खुशियों से भरे घर संसार ,
     न हो जिंदगी में आपकी हार।
बनो आप इतने बड़े फनकार,
     कामयाबी कदम चूमे हर बार।
बन महान छोड़ ऐसा असर ,
     आप  हो  जाओ  सदा  अमर।
धाकड़ अमित‘ की यही पुकार ,
     प्रभु कृपा रहे आप पर बरकरार। 

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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रक्षाबंधन  (दोहा)

धाकड़ अमित दोहा :

अति पावन स्नेह बंधन, रक्षा का अनमोल।
भाई – बहन रिश्तों में, और मिठास दे घोल॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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गलती किस से नहीं होती (मुक्तक)


गलती किस से नहीं होती मैं भी एक इंसान हूँ।

हड़बड़ी हो गई मुझसे नहीं कोई शैतान हूँ॥

माफ करना मुझे इस गलती के लिए अब नहीं होगी,

कोशिश करूँगा फिर न हो मैं थोड़े ही कोई भगवान हूँ॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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