नेता खड़ा पिपासा तख्त के लिए (मुक्तक)

मुक्तक :

image

जैसे पपीहा* रहे प्यासा उस वक्त के लिए।
जैसे दुश्मन रहे प्यासा उस रक्त के लिए॥
वैसे ही धन प्यास ऐसी कि बुझाये से भी न बुझे;
जैसे नेता खड़ा पिपासा उस तख्त के लिए॥

*पपीहा : एक पक्षी होता है जिसे चातक के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि यह केवल स्वाती नक्षत्र में होने वाली वर्षा का ही जल पीता है ।

कविअमित चन्द्रवंशी

यह भी पढ़ें :

मैं घर पर सूरज नहीं देखता (कविता)

नव वर्ष (छंद)

सर्दी की दस्तक (कविता)

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s