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हमारी धरती… (कविता)

​धरा वस्त्र थे ये पेड़, जल था आभूषण ।
कर दिया सब खत्म, लाकर ये प्रदूषण॥

धरती की सुंदरता, थी उसकी हरियाली।
छीनी नासमझों ने, पाने क्षणिक खुशहाली॥

अब देखो मौसम बदले, फैलें नई-नई बीमारी।
अब तो संभल जाओ, समझो जिम्मेदारी॥

ऐसे कैसे बने लालची, बढ़ा ली है आफत।
कहाँ गई वो समझदारी, तुमको तो है लानत॥

अपने आने वाले बच्चों को, थोड़ा तो करो प्यार।
पेड़ लगाकर बन जाओ तुम, अब तो समझदार॥

जागरूक होने में ही है, आज सबकी भलाई।
वर्ना बचा न पाओगे, चाहे कितनी हो कमाई॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी 

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पर्यावरण पर नारे (Slogans on Environment)

​1.काटो पेड़ बहाओ पानी,
   मौत है फिर जरूर आनी।

2.कोई काम न आएगी दुआ,
   जो जल-पेड़ों का नाश हुआ।

3.अगर भविष्य सुनिश्चित करना है,
    तो पेड़ों का जरूरी लगना है।

4.करो सुरक्षित पर्यावरण,
   नहीं तो निश्चित है मरण।

5.जो पेड़ काटते जायेंगे,
   तो जी हम कैसे पायेंगे।

6.पेड़ों को तुम्हें बचाना है,
   यही तो धरा खजाना है।

7.धरती है तब तक सुंदर,
    पेड़-पानी है जब तक भू पर।

8.मौसम है पल पल में बदले,
   पृथ्वी ले रही आप से बदले।

9.जब सब कुछ ही होगा प्रदूषित,
   तब रहेंगे कैसे धरती पर जीवित।

10.तब ही सुरक्षित पीढ़ी है,
     जब तक पेड़ों की सीढ़ी है।

11.बंद हों अब अत्याचार,
     हरा भरा करो संसार ।

12.अब तो थम जा तू तो जरा,
      नहीं तो मिट जाएगी ये धरा।

13.सीमित थे प्रकृति के संसाधन,
      वो हुए खत्म तो कैसे निर्वाहन।

14. भविष्य है खतरे में पड़ा,
      जब तक है प्रदूषण खड़ा।

15.आज नहीं तो कल मरा,
      जो सूख गई ये यदि धरा।

द्वारा – अमित चन्द्रवंशी