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मातृभाषा का सम्मान

आज के समय में हिन्दी भाषा की हालत इतनी खराब हो गई है कि यदि किसी हिन्दी मातृभाषी से कभी हिन्दी लिखवाई जाए तो बहुत ही कम लोग शुद्ध हिन्दी लिख पायेंगे। शुद्ध लिखने की बात भी छोड़ दीजिए वो हिन्दी भी लिखने में बगले झाँकते दिखेंगे।तब स्वामी विवेकानंद जी की एक यात्रा का वृतांत याद आता है।

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  श्रीराम जी भी मनाते थे दीपावली

दीपावली मनाने के पीछे बदलते समय के साथ सभी के अलग-अलग मत(विचार) हैं और हो भी क्यों नहीं? क्योंकि दीपावली का प्रतीक है ही ऐसा…

दीपावली प्रतीक है‘ जानने के लिए click करें

दीपावली को मनाने के लिए कथाएँ तो बहुत मिलती हैं और अधिकांश यही मानते हैं कि दीपावली के दिन श्रीराम जी लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध करके अयोध्या वापस लौटे थे, अतः उनके अयोध्या लौटकर आने की खुशी में दीपावली का त्योहार मनाने की शुरूआत हुई थी परन्तु आपको यह जानकर अचरज होगा कि दीपोत्सव तो पहले से ही मनाया जा रहा था और जिसे स्वयं श्रीराम भगवान भी मनाते थे और उस दिन भी मनाया गया था।

तो हम आपको बता दें कि श्रीराम जी से जुड़ी हर कथा के लिए आदिकवि वाल्मीकि जी की रामायण को मुख्य स्त्रोत माना जाता है। जिसे सत्य और प्रमाणित माना जाता है तथा उन्हीं के द्वारा रचित आनंदरामायण के सारकाण्ड के चौथे सर्ग के 3 से 19 श्लोक तक वर्णन मिलता है कि

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