Archives

वानर जाति भी हुई महान…

हनुमानजी के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है, पर कुछ इतनी विशेष बातें हमें सीखने को मिलती हैं।जो हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं और हमारे आत्मविश्वास को सदैव बनाए रखती हैं । 
हनुमानजी ने वानर रूप में जन्म लिया था और उस वानर को नीच जाति का प्राणी माना गया है जैसा तुलसीदास जी ने भी एक चौपाई के द्वारा बताया है कि-

Continue reading

Advertisements

शिवद्रोही राम जी का सेवक नहीं हो सकता (भगवान को लेकर लड़ाई क्यों???)

आज संसार में सभी अपने धर्म को श्रेष्ठ बताने से पीछे नहीं हटते और इसी वजह से कई लड़ाईयाँ हुईं हैं ।
 यदि आपको सभी धर्मों को भी छोड़ दो तो अकेले सनातन धर्म में ही इतने भगवान और देवी-देवता हैं कि लोगों ने अपनी श्रद्धानुसार किन्हीं भगवान को मन ही मन अपना ईष्ट मान लिया है और जब भी सनातन धर्मियों में भगवान की बात छिड़ती है तो वो अपने ईष्ट देव को बड़ा बताने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाते हैं ।
 तब बात यही होती है कि कौनसे भगवान श्रेष्ठ  (बड़े) हैं ? और यह श्रेष्ठता का फेर ही लड़ाई का कारण बन जाता है ।

Continue reading

जहर पीकर भी कैसे अमर हुआ नहीं जा सकता… (मुक्तक)

Shiv Shankar, Bhole Baba

कौन कहता है कि मुर्दे में जान को लाया नहीं जा सकता।
और असंभव को भी कभी संभव बनाया नहीं जा सकता॥
उन भोले बाबा से पूछो कि काज कैसे बनाया जाता है;
कि जहर पीकर भी कैसे अमर हुआ नहीं जा सकता॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

Also visit on Facebook.

Also read in Hinglish.

यह भी पढ़ें :

हनुमानजी की पूँछ में आग क्यों नहीं लगी? 

बिन मौसम मौसमों का मजा लीजिए (मुक्तक)

तू एक कदम तो चल… (मुक्तक)

होली (कविता)

मैं घर पर सूरज नहीं देखता… (कविता)

चारों वर्णों की वास्तविकता  (Reality of Caste)

हमेशा से ही जात-पात को लेकर मतभेद होते रहते हैं और कहीं न कहीं जातिवाद के कारण स्वयं को श्रेष्ठ दिखाने की भावना मन में उत्पन्न हो ही जाती है जो कभी न कभी कहीं लड़ाई का कारण बन ही जाती है। यह सब सृष्टि के आरंभ से ही होता आ रहा है जबसे इन वर्णों की सृष्टि हुई है। अब आप सोच रहे होंगे कि इनकी भी सृष्टि, आरंभ से कब की गई है??? सच मानिए यदि आपको यह पता होता तो आपको निश्चित ही यह भी मालूम होता कि इनको किस तरह से बनाया गया है और इनका क्या अर्थ है।और न ही आप जातिवाद को लेकर लड़ते और न ही आप अपनी जाति को लेकर लड़ते।

मैं आपका ज्यादा समय नहीं लेते हुए बता देता हूँ कि जैसा श्रीकृष्ण जी ने भगवद् गीता के चौथे अध्याय के 13 वे श्लोक में कहा है कि

Continue reading

कौनसा काम कठिन है… (लेख)

Hanuman Ji - The great power

कवन सो काज कठिन जग माहीं। 
जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
(अर्थात् जगत में ऐसा कौनसा कठिन काम है। जो हे! तात तुमसे न हो सके।)(रामचरितमानस 4.30.4) 

इस चौपाई का अर्थ बड़ा गहरा है यदि इसे आपने जान लिया तो सच मानिये। आप के लिए कोई भी कार्य करना कठिन नहीं होगा। पर आप कहोगे ये बात तो हनुमानजी के लिए कही गई है और वो तो बड़े शक्तिशाली थे और उन्हें भिन्न भिन्न देवताओं से भिन्न भिन्न शक्तियाँ वरदान स्वरूप मिली हैं। तो उनके लिए कुछ भी करना असंभव नहीं है।

पर एक बात आप भूल रहे हो कि यह बात उन सामान्य हनुमानजी से जामवंत जी द्वारा कही गई थी जो खुद नहीं जानते थे कि उनके पास इतनी असीमित शक्तियाँ है कि उनके लिए समुद्र लांघना क्या? पूरी लंका को ही यहाँ उठाकर लाने की शक्ति थी। फिर अकेले समुद्र पार करने की बात ही छोड़ दो और वो अन्य बातें भी छोड़ दो कि वो अकेले लंका जाकर क्या क्या नहीं कर सकते।खैर, यह सब आपको पता ही है।

Continue reading

  श्रीराम जी भी मनाते थे दीपावली

दीपावली मनाने के पीछे बदलते समय के साथ सभी के अलग-अलग मत(विचार) हैं और हो भी क्यों नहीं? क्योंकि दीपावली का प्रतीक है ही ऐसा…

दीपावली प्रतीक है‘ जानने के लिए click करें

दीपावली को मनाने के लिए कथाएँ तो बहुत मिलती हैं और अधिकांश यही मानते हैं कि दीपावली के दिन श्रीराम जी लंका के अत्याचारी राजा रावण का वध करके अयोध्या वापस लौटे थे, अतः उनके अयोध्या लौटकर आने की खुशी में दीपावली का त्योहार मनाने की शुरूआत हुई थी परन्तु आपको यह जानकर अचरज होगा कि दीपोत्सव तो पहले से ही मनाया जा रहा था और जिसे स्वयं श्रीराम भगवान भी मनाते थे और उस दिन भी मनाया गया था।

तो हम आपको बता दें कि श्रीराम जी से जुड़ी हर कथा के लिए आदिकवि वाल्मीकि जी की रामायण को मुख्य स्त्रोत माना जाता है। जिसे सत्य और प्रमाणित माना जाता है तथा उन्हीं के द्वारा रचित आनंदरामायण के सारकाण्ड के चौथे सर्ग के 3 से 19 श्लोक तक वर्णन मिलता है कि

Continue reading

धनतेरस मुक्तक

धनतेरस मुक्तकतन   बलिष्ठ   हो  मन  हर्षित  हो ।
सब   मनोंकामनायें  फलित   हो॥
रहे ‘अमित’ यम-धन्वन्तरि आशीष,
खुशी धन दीप सदा प्रज्वलित हो॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

Also read in Hinglish.

धनतेरस की पूर्ण कथा जानने की लिए यहाँ click करें

Also visit my Facebook Page.

यह भी पढ़ें:

हनुमानजी की पूँछ में आग क्यों नहीं लगी?

दहेज प्रथा की वास्तविकता  (Reality of Dowry System)

दीपावाली प्रतीक है 

आजकल के बच्चे  (Modern poem)