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गलती किस से नहीं होती (मुक्तक)


गलती किस से नहीं होती मैं भी एक इंसान हूँ।

हड़बड़ी हो गई मुझसे नहीं कोई शैतान हूँ॥

माफ करना मुझे इस गलती के लिए अब नहीं होगी,

कोशिश करूँगा फिर न हो मैं थोड़े ही कोई भगवान हूँ॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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नेता खड़ा पिपासा तख्त के लिए (मुक्तक)

मुक्तक :

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जैसे पपीहा* रहे प्यासा उस वक्त के लिए।
जैसे दुश्मन रहे प्यासा उस रक्त के लिए॥
वैसे ही धन प्यास ऐसी कि बुझाये से भी न बुझे;
जैसे नेता खड़ा पिपासा उस तख्त के लिए॥

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बेचारा रावण(कुण्डलिया)

धाकड़ अमित कुण्डलिया :

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रावण का क्या हाल था, कैसे वो बतलाय।
सब कहते थे राम भज,अपना कोइ न पाय॥
अपना कोइ न पाय,तब सब को वो डराता।
बताये नीति  बात , अरु वीरों को लड़ाता॥
कहे ‘अमित‘ कविराय,वीरों का था बहाना।
रावण से तो दूर, शुभ राम हाथ मर जाना॥

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साधु नाम आज उसका पड़ा (कविता)

साधु
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साधु नाम आज उसका पड़ा ।
जिसका ढोंग आज सबसे बड़ा ॥

बढ़ा के दाढी बना के जटा ,
लगा तिलक और भगवा कपड़ा।

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