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मैं उस कर्म की बात करूँगा… (मुक्तक)

न जात की बात करूँगा, न धर्म की बात करूँगा ।
न गर्व की बात करूँगा, न शर्म की बात करूँगा॥
इंसान होने का वो महान फर्ज बस तुम अदा कर दो,
ला दे जो दुनिया में खुशी, मैं उस कर्म की बात करूँगा ॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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जहर पीकर भी कैसे अमर हुआ नहीं जा सकता… (मुक्तक)

Shiv Shankar, Bhole Baba

कौन कहता है कि मुर्दे में जान को लाया नहीं जा सकता।
और असंभव को भी कभी संभव बनाया नहीं जा सकता॥
उन भोले बाबा से पूछो कि काज कैसे बनाया जाता है;
कि जहर पीकर भी कैसे अमर हुआ नहीं जा सकता॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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मैं घर पर सूरज नहीं देखता… (कविता)

मेरा भारत आज तक उन्हें नम आँखों से ढूँढता है(मुक्तक)

मेरा भारत आज तक उन्हें नम आँखों से ढूँढता है।
जिनका नारा आज भी दिलों दिमाग में गूँजता है॥
वो ‘दिल्ली चलो’ बोलकर ‘हिन्द फौज’ भेज गए,
पर आप कहाँ रह गए ये आज पूरा भारत पूछता है॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

धनतेरस मुक्तक

धनतेरस मुक्तकतन   बलिष्ठ   हो  मन  हर्षित  हो ।
सब   मनोंकामनायें  फलित   हो॥
रहे ‘अमित’ यम-धन्वन्तरि आशीष,
खुशी धन दीप सदा प्रज्वलित हो॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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गलती किस से नहीं होती (मुक्तक)


गलती किस से नहीं होती मैं भी एक इंसान हूँ।

हड़बड़ी हो गई मुझसे नहीं कोई शैतान हूँ॥

माफ करना मुझे इस गलती के लिए अब नहीं होगी,

कोशिश करूँगा फिर न हो मैं थोड़े ही कोई भगवान हूँ॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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नेता खड़ा पिपासा तख्त के लिए (मुक्तक)

मुक्तक :

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जैसे पपीहा* रहे प्यासा उस वक्त के लिए।
जैसे दुश्मन रहे प्यासा उस रक्त के लिए॥
वैसे ही धन प्यास ऐसी कि बुझाये से भी न बुझे;
जैसे नेता खड़ा पिपासा उस तख्त के लिए॥

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माँ (मुक्तक)

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जो बिना कुछ कहे मन की हर बात जान सकती है।
खुद दुख लेकर संतान के लिए हर सुख बरसाती रहती है॥
जिसके ममता भरे आँचल को पाने देवता भी तरसते हैं,
उन माँ की ममता को ‘अमित‘ की जुबाँ भला कैसे कह सकती है।
  
कविअमित चन्द्रवंशी

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