नवोदय चालीसा

॥श्री गणेशाय नमः॥

दोहे:

सपना था राजीव का, बने एक संस्थान।
प्रतिभावान छात्रजन, पायें जिसमें ज्ञान॥1॥
शिक्षा पायें यहाँ पर, गुणी बालक गरीब।
बच्चें रक्षा कर सकें, बन भारत की नींव ॥2॥

चौपाई :

हर बच्चा शिक्षित जब होगा।
भारत विकसित तब ही होगा॥1॥
भारत तब नवोदय करेगा ।
जब हर ईक बच्चा पढ़ेगा ॥2॥

साकार तब राजीव सपना ।
छियासी में जब ‘नवोदय’ बना ॥3॥
अति सुंदर मंदिर विद्यामय।
‘जवाहर नवोदय विद्यालय’ ॥4॥
शिक्षा नीति अति राष्ट्र प्रेरी।
संस्था ‘नवोदय’ बहुत घनेरी॥5॥
गुणी विद्यार्थी पाते मौका।
तरती उनकी जीवन नौका॥6॥
हिंद दिशि दिशि नवोदय फैला ।
सकल दिशा लगे ज्ञान मेला॥7॥
नई नई योजना चलावा।
भिन्न भिन्न उद्देश्य कहावा॥8॥
प्रथम योजना का उद्देशा।
शिक्षा वंचित रहे न देशा॥9॥
साहसपूर्ण क्रिया करवाता।
शारीरिक शिक्षा दिलवाता॥10॥

प्रर्यावरणहि प्रति चेताता।
मूल्यपरक शिक्षा दिलवाता॥11॥
आधुनिक बहु शिक्षा प्रदत्ता।
अति श्रेष्ठ शिक्षा गुणवत्ता॥12॥
द्वितीय योजना उद्देशा ।
त्रिभाषिक ज्ञान रूप संदेशा॥13॥
तीनहि भाषिक ज्ञान सिखावे।
सकल रूपहि दक्षितहि करावे॥14॥
तृतीय योजना उद्देशा ।
होकर एक रहे शुचि देशा ॥15॥
विद्यार्थी प्रवजन कराता ।
अति राष्ट्र एकता बढ़ाता॥16॥
बच्चे षष्ठ कक्षा से आवें।
जो परीक्षा पास कर पावें ॥17॥
मुफ्त आवास ड्रेस अरु खाना ।
पाठ्यपुस्तक करे प्रदाना॥18॥
नवी कक्षा से लगत रुपिया।
लेत माह प्रति दो सौ रुपिया॥19॥
गरीब बालक मुफ्त पढ़ाई।
बालिका को नही कठिनाई ॥20॥

जेहि जन अनुसूचित जनजाति।
लाभित सह अनुसूचित जाति॥21॥
शारीरिक विकलांग जो आवे।
सबहि निशुल्क शिक्षा पावे॥22॥
अति उत्तम सह शिक्षा करावे।
सीबीएसई कोर्स चलावे॥23॥
हिन्दी अंग्रेजी के अलावा।
ऐच्छिक क्षेत्र भाषा चलावा ॥24॥
पंजाबी गारो गुजराती।
नेपाली मलयालम भाती॥25॥
बांग्ला बोडो मिजो उड़िया।
तमिल खासी उर्दू असमिया ॥26॥
कन्नड़ सिंधी मणिपुरी लावा।
मराठी व तेलगू चलावा॥27॥
अरबी सह सब भाषा लाई।
सब उन्नीस भाषा चलाई॥28॥
नित दिन योगासन करवाना ।
भिन्न भिन्न खेल बतलाना॥29॥
चार सदन यहाँ पर बनाये ।
अति सुंदर गिरि नाम रखाये॥30॥

सदन शुचि अरावली नीलगिरि।
और हैं शिवालिक व उदयगिरि॥31॥
कनिष्ठ वरिष्ठ आठहि सदना।
बहुविध छात्र-छात्रा बसना॥32॥
भिन्न प्रतिस्पर्धा करवाता ।
कला प्रदर्शन अवसर दाता॥33॥
हर एक चीज ध्यान रखाता।
कोई भी तकलीफ न पाता॥34॥
अमित ज्ञान जन में फैलावा।
सबहि धर्महि मंदिर कहावा॥35॥
जो बच्चें नवोदय में पढ़ें।
बच्चे सदा नित आगे बढ़ें॥36॥
अवगुण मत कोई रह पाये।
केवल गुण ही गुण सुहाये॥37॥
ग्रामीण बच्चे अधिक आवा।
सबहि चहुंमुखी विकास पावा॥38॥
‘धाकड़ अमित’ कह मधुर वचना।
श्वान काक वक सम गुण रखना॥39॥
विद्यार्थी उत्तम गुण पाता।
और अपना भविष्य बनाता॥40॥

दोहा:

ज्ञान मिले हर तरह का, उनमें आगे होय।
शिक्षित हों हर विषय में, पीछे रहे न कोय॥

॥इति नवोदय चालीसा॥

 रचनाकार – अमित चन्द्रवंशी

(रचनाकाल  अगस्त 2010)

नोट : कृपया नवोदय चालीसा में यदि किसी बदलाव की जरूरत हो तो अवश्य बताएँ क्योंकि यह चालीसा 2010 में बनाई गई थी तो आज के समय के अनुसार हो सकता है updates required हों।

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