वानर जाति भी हुई महान…

हनुमानजी के जीवन से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है, पर कुछ इतनी विशेष बातें हमें सीखने को मिलती हैं।जो हमें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं और हमारे आत्मविश्वास को सदैव बनाए रखती हैं । 
हनुमानजी ने वानर रूप में जन्म लिया था और उस वानर को नीच जाति का प्राणी माना गया है जैसा तुलसीदास जी ने भी एक चौपाई के द्वारा बताया है कि-


प्रात लेइ जो नाम हमारा। तेहि दिन ताहि न मिले अहारा॥
(रामचरितमानस 5.7.8)


अर्थात् बंदरों को इतना अशुभ माना जाता है कि अगर कोई जीव सुबह उठते ही वानर को देख ले या उसका नाम ले ले। तो उसका सारा दिन बेकार जाता है और यहाँ तक कि ऐसी स्थिति भी आ जाती है कि दिनभर खाने को खाना भी नहीं मिलता।

तुलसीदास जी ने बालकाण्ड के आरंभ में ही बताया है कि


सठ सेवक की प्रीति रुचि रखिहहिं राम कृपालु ।
उपल किए जलजान जेहिं सचिव सुमति कपि भालु ॥२८ (क )॥


प्रभु तरु तर कपि डार पर ते किए आपु समान ।
तुलसी कहूँ न राम से साहिब सीलनिधान ॥२९ (क )॥

श्री राम जी ने कहाँ पेड़ की शाखाओं पर कूदने वाले बंदरों को भी अपने समान बना लिया। अर्थात् राम भगवान ने उनको इतना श्रेष्ठ बना दिया कि जिन बंदर-भालुओं का मात्र जानवर समझा जाता था। आज उनको सम्मान की दृष्टि से ही नहीं देखते अपितु इतना श्रेष्ठ बना दिया कि आप उन्हें जानवर कहने की भारी भूल भी नहीं कर सकते।

हनुमानजी जो राम जी के भक्त थे वो इतने महान बन गए जिनको तब वानर जाति स्वरूप में चंचल और सभी प्रकार से नीच माना जाता था।पर हनुमानजी ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति को प्रदर्शित करते हुए उन्होंने नीच समझी जाने वाली जाति को महान बना दिया।

कहहु कवन मैं परम कुलीना । कपि चंचल सबहीं बिधि हीना ॥
( रामचरितमानस 5.7.7)

और जबसे उन्होंने राम नाम अपनाया तब वह इतने महान बन गए कि आज उनको पूरा संसार पूजता है।

यह भी भक्ति और उसकी शक्ति से ही संभव है अर्थात् अगर आप दृढ़ निश्चिय कर लो और एक समर्पित भक्त की तरह कार्य करें तो अवश्य ही आप दुर्लभ से दुर्लभ कार्य कर सकते हो। जिस प्रकार से हनुमानजी ने राम नाम को अपने मन में रखकर अपने आप को इतना बलशाली बना लिया कि उन्होंने असंभव से असंभव कार्य बड़ी सहजता से कर लिए।
तब आप मनुष्य होकर और कार्य में श्रद्धाभाव रखकर कदाचित कठिन कार्य सहजता से नहीं कर सकते।
हनुमानजी ने किस प्रकार से कार्य किए हैं। उन्हें स्मरण करके उनसे सीख लेते हुए। हमें भी हर कार्य को करने का प्रयत्न करना चाहिए।

लेखक – अमित चन्द्रवंशी 

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