चारों वर्णों की वास्तविकता  (Reality of Caste)

हमेशा से ही जात-पात को लेकर मतभेद होते रहते हैं और कहीं न कहीं जातिवाद के कारण स्वयं को श्रेष्ठ दिखाने की भावना मन में उत्पन्न हो ही जाती है जो कभी न कभी कहीं लड़ाई का कारण बन ही जाती है। यह सब सृष्टि के आरंभ से ही होता आ रहा है जबसे इन वर्णों की सृष्टि हुई है। अब आप सोच रहे होंगे कि इनकी भी सृष्टि, आरंभ से कब की गई है??? सच मानिए यदि आपको यह पता होता तो आपको निश्चित ही यह भी मालूम होता कि इनको किस तरह से बनाया गया है और इनका क्या अर्थ है।और न ही आप जातिवाद को लेकर लड़ते और न ही आप अपनी जाति को लेकर लड़ते।

मैं आपका ज्यादा समय नहीं लेते हुए बता देता हूँ कि जैसा श्रीकृष्ण जी ने भगवद् गीता के चौथे अध्याय के 13 वे श्लोक में कहा है कि

 चातुर्वणर्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः।

(अर्थात् ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र- इन चार वर्णों का समूह, गुण और कर्मों के विभागपूर्वक मेरे द्वारा रचा गया है।)

   अब आपको यह नहीं समझना चाहिए कि जिस व्यक्ति ने जिस वर्ण में जन्म लिया है, उसका वही वर्ण हो गया।अपितु उसके गुणों और कर्मों से निर्धारित होता है कि वह किस वर्ण का होगा।
   अर्थात् ब्राह्मण वंश में जन्मा व्यक्ति जरूरी नहीं कि वह ब्राह्मण ही होगा वह क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र भी हो सकता है।
हम आपको बता दें कि वर्णों को किस तरह से उन के किन-किन कार्यों के द्वारा किन-किन वर्णों में विभाजित किया गया है।
    दूसरों को ज्ञान देने वाले विद्वानों के वर्ग को ब्राह्मण कहा गया है । प्रशासक अथवा रक्षा करने वाले वर्ग को क्षत्रिय कहा गया है । पदार्थों के आदान-प्रदान करने वाले वर्ग को वैश्य कहा गया है और कठिन श्रम करने वाले व सेवा का भाव रखने वाले वर्ग को शूद्र कहा गया है । 
अब आप स्वतः ही समझ गए होंगे कि यह चार वर्ण क्या हैं और आप कौनसे वर्ण में आते हैं। उदाहरण के तौर पर एक शिक्षक ब्राह्मण वर्ग में आता है और एक शिष्य शूद्र वर्ग में आता है जो कठिन श्रम करता है।और एक व्यापारी  (Business man) वैश्य वर्ग में आता है।

सामान्य तौर पर संतान पर अपने माता-पिता के गुण और संस्कार आ जाते हैं तब ही तो पुराने समय में कहा जाता था कि ब्राह्मण के घर में जन्मा ब्राह्मण ही होगा या क्षत्रिय के घर में जन्मा क्षत्रिय ही होगा। पर आज के समय में माता पिता की छाया पड़ने से पहले ही पाश्चात्यकरण की छाया पड़ जाती है ।तब यह कहना मुश्किल हो जाता है कि ब्राह्मण के घर में जन्मा ब्राह्मण ही होगा या क्षत्रिय के घर में जन्मा क्षत्रिय ही होगा।
    मैं आशा करता हूँ कि आपको चार वर्ण (caste) होने का अर्थ मालूम हो गया होगा।
   परन्तु आज के समय में जाति को लेकर अलग ही विचारधारा बन गई है और वो है – अधिकारों की।अब मैं इस पर ज्यादा कुछ लिखना नहीं चाहता क्योंकि इस पर बहुत कुछ कहा गया है और कहा जा रहा है ।और न ही इस पर बात करने पर कोई अर्थ निकलने वाला।और क्यों नहीं निकलेगा ये भी आप भलि-भाँति जानते हैं।

 तो इसी के साथ में अपने इस लेख को विराम देता हूँ ।

लेखक – अमित चन्द्रवंशी 

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