कौनसा काम कठिन है… (लेख)

Hanuman Ji - The great power

कवन सो काज कठिन जग माहीं। 
जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
(अर्थात् जगत में ऐसा कौनसा कठिन काम है। जो हे! तात तुमसे न हो सके।)(रामचरितमानस 4.30.4) 

इस चौपाई का अर्थ बड़ा गहरा है यदि इसे आपने जान लिया तो सच मानिये। आप के लिए कोई भी कार्य करना कठिन नहीं होगा। पर आप कहोगे ये बात तो हनुमानजी के लिए कही गई है और वो तो बड़े शक्तिशाली थे और उन्हें भिन्न भिन्न देवताओं से भिन्न भिन्न शक्तियाँ वरदान स्वरूप मिली हैं। तो उनके लिए कुछ भी करना असंभव नहीं है।

पर एक बात आप भूल रहे हो कि यह बात उन सामान्य हनुमानजी से जामवंत जी द्वारा कही गई थी जो खुद नहीं जानते थे कि उनके पास इतनी असीमित शक्तियाँ है कि उनके लिए समुद्र लांघना क्या? पूरी लंका को ही यहाँ उठाकर लाने की शक्ति थी। फिर अकेले समुद्र पार करने की बात ही छोड़ दो और वो अन्य बातें भी छोड़ दो कि वो अकेले लंका जाकर क्या क्या नहीं कर सकते।खैर, यह सब आपको पता ही है।

सबसे मजेदार बात तो यह थी कि हनुमानजी भी अन्य वानरों और भालूओं की तरह उदास थे जो अपना सामर्थ्य तो बताते पर बाद में यहीं आकर रुक जाते कि वो ये नहीं कर सकते। और उन्हीं की वाणी में उनके साथ मिलकर कह रहे थे कि ये मैं नहीं कर सकता।

वो (हनुमानजी) क्या बोल रहे थे कि ये मैं नहीं कर सकता पर बाद में उन्होंने यह सब किया और उससे भी बहुत कुछ ज्यादा ।
पर यह सब हो क्या रहा था? यहाँ पर दो शक्तियाँ काम कर रहीं थी एक थी नकारात्मक शक्ति (negative power) और दूसरी सकारात्मक शक्ति (Positive Power)। नकारात्मक शक्तियाँ जो उन वानरों से आ रही थी जो उन्हें कोई कार्य करने से रोक रही थी और वो एक बात बार – बार दोहरा रहे थे कि वो वह कार्य नहीं कर सकते ।

पर हनुमानजी ये बात क्यों कह रहे थे तो आप कहोगे कि उन्हें श्राप मिला हुआ था।
तो मैं आपसे पूछना चाहूँगा कि कोई भी कठिन कार्य करने से पहले आप ये क्यों कहते हो कि यह काम तो बहुत कठिन है और शायद ही हो पाएगा। पर जब आप उसे करते हो तो वह हो जाता है तब मैं आपसे पूछना चाहूँगा कि आपको कौनसा श्राप मिला है।

हाँ, आपको श्राप मिला है अपने आप को भूलने का।

एक इंसान क्या नहीं कर सकता? आप  देखते हो कि दुनियाभर से खबरें आती हैं कि इसने ये कर लिया उसने ये कर लिया । यह सब करता कौन है – एक इंसान ही न? और हाँ, एक अकेला इंसान यह सब नहीं कर सकता ।क्यों??? 

बात वही है कि उसने स्वयं को उन चीज़ों के लिए पारंगत नहीं किया है और उसने अपने आप को सीमित कर रखा है…
और यहीं वो रुक जाता है क्योंकि वो आगे जाकर और कुछ जानना नहीं चाहता है या करना नहीं चाहता है। यह सब आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति पर निर्भर करता है।

शक्तियाँ सभी को समान रूप से मिली हैं। अंतर बस इतना है कि आप इनको किस तरह से उपयोग में ला सकते हो।
एक साधारण सा उदाहरण है विद्यार्थियों द्वारा विद्या का ग्रहण करना।होने को तो सभी के पास समान शक्ति हैं पर ग्रहण करने का सामर्थ्य सभी का अलग अलग है और इसी आधार पर सभी विद्यार्थियों की अलग अलग पहचान हो जाती है।और इसी आधार पर उनका मूल्यांकन किया जाता है।

इसी तरह सभी वानरों की शक्ति समान थी पर हनुमानजी ने विशेष आशीर्वाद प्राप्त करके उन पर अभ्यास किया और उन पर महारत प्राप्त तो कर ली पर वह हर बार भूल जाते कि वह यह कर सकते हैं ।
इसी तरह इंसान इस भुलावे में है कि ‘मैं यह कर ही नहीं सकता।’

बस, यदि आपको कोई जाग्रत करने वाला मिल जाए तो आपकी जिंदगी का नया मोड़ मिल जाए।

आप हनुमानजी की तरह शक्तिशाली तो नहीं बन सकते पर कम से कम अपनी कुछ शक्तियाँ तो जाग्रत कर लो ताकि आपके काम से आपकी पहचान बन जाए।

इन्हीं शुभकामनाओं के साथ…

लेखक- अमित चन्द्रवंशी

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2 thoughts on “कौनसा काम कठिन है… (लेख)

  1. बहुत अच्छा लिखा है आपने ।इंसान अपनी दृढ इच्छा शक्ति द्वारा बहुत कुछ हासिल कर सकता है।

    Liked by 1 person

    • बहुत-बहुत धन्यवाद गायत्री जी आपके बहुमूल्य टिप्पणी के लिए । सचमुच यदि इंसान ने खुद को समझ लिया तो कुछ भी मुमकिन नहीं है।

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