पिता (दोहा)

धाकड़ अमित दोहा :

निज सुख से पहले रहे, सदैव गृह सुख ध्यान।
पितृ कर्ज से कभी उऋण, न हो सके संतान॥

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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2 thoughts on “पिता (दोहा)

  1. पिता पर हुआ दोहा विधि विधान सम्मत नहीं है।
    त्रुटियाँ है आदरणीय।

    निज सुख से पहले रखे,
    11 11 2 112 12=13
    सदा गृह सुख ध्यान।
    12 11 11 21=10
    पितृ ऋण से कभी उऋण,
    11 11 2 12 111=12
    न हो सके संतान।
    1 2 12 2 21=11

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    • सिंगापुरिया जी आपकी बहुमूल्य टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद…
      अब गलती को सुधार लिया गया है अपितु छंद विधान अनुरूप स्वतः ही मात्राओं में छंद आ जाते थे इसलिए कभी मात्राओं की गणना पर कभी ध्यान नहीं दिया । अतः अब ध्यान दिया जाएगा…

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