एक मुस्कान (कविता)

एक मुस्कान

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जो काम कर सकती है एक मुस्कान ।
उसका आपको नहीं है जरा सा भी भान॥
एक राजा से लेकर रंक के लिए समान ।
बिन मोल मिले है ये अनमोल मुस्कान ॥ 

मनमोहक निश्छल मीठी है मुस्कान ।
जिस पर तो निर्जीव भी होय कुर्बान ॥

मानो दुख की घड़ी में है ये राम बाण ।
डाल देती है ये मुर्दे से तन में भी प्राण ॥
किसी मुरझाये चेहरे या गमगीन समां में ।
घोल देती है ये मिठास पूरी फिजा में ॥
जो जाने  है ‘अमित ‘ गम में भी मुस्कुराना ।
तो दुनिया की हर ताकत से मुश्किल है उसे हराना ॥
कवि अमित चन्द्रवंशी

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