दहेज प्रथा की वास्तविकता(Reality of Dowry System)

image

वास्तव में दहेज प्रथा क्या थी और अब उसको क्या माना जा रहा है जिसकी वजह से आज इसको एक कुरीति के रूप में घोषित किया जा रहा है।जिसने आज एक घर की बेटी व उसके परिवारजनों का कितना कष्ट दिया है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता।यह दहेज प्रथा वह शूल बन गई है जो समाज के अंग से निकलने का नाम नहीं ले रही है व हरदम टीस दे रही है।

दहेज प्रथा ने एक लड़की को बोझ बना दिया है जिसने प्राथमिक रूप से सर्वप्रथम परिवारजनों को एक कन्या के जन्म लेते ही मानसिक रूपी अनावश्यक कष्ट दिया है और फिर उसके बाद लड़की के लिए असहय कष्ट। जो कभी कभी लड़कियों के लिए प्राणघातक तक बन गया है या जिसने लड़कियों को घुट-घुटकर रहने पर विवश कर दिया है।

परंतु मूल रूप से यह दहेज प्रथा इतनी भयावह नहीं थी जितनी यह आज दिखती है। बल्कि इसके ठीक विपरीत यह वह प्रथा थी, जो एक नवविवाहित युवती के लिए अपार सुख देने वाली थी और उसके माता-पिता को आश्वस्त करती थी कि उनकी बेटी जहाँ भी रहेगी वहाँ सुखी ही रहेगी।

दहेज प्रथा वो प्रथा थी जिसमें अपने दिल के टुकड़े को दूर होने के डर से माता-पिता प्रेमवश होकर प्यार को लुटाने वाले हाथों से स्नेहपूर्वक वह सामग्रियाँ प्रदान करते थे जो उनकी प्रिय बेटी को अधिक प्रिय होता था और अन्य सुख सुविधाओं की वस्तुएँ प्रदान करते थे ताकि उनकी बेटी आराम से रहे।आप जानते होंगे कि जब किसी राजकुमारी की विदाई होती थी तब एक राजा अपनी प्यारी बेटी के साथ अपनी बेटी की प्रिय दासियाँ भी साथ में भेज देते थे ताकि उनकी बेटी को ज्यादा असहज नहीं लगे और वे दासियाँ उनकी बेटी का अच्छे से ध्यान रख सकें।

परंतु जैसे-जैसे समय बीतता गया, दहेज प्रथा में बदलाव आते गये। परंतु वर्तमान समय में इसका स्वरूप इस प्रकार से बदल गया है कि अब वर पक्ष दहेज को लेना अपना अधिकार ही मानने लगे हैं जो बिल्कुल भी उचित नहीं है।

दहेज प्रथा का बदल जाना इतना चिंताजनक नहीं है जितना दहेज प्रथा के संदर्भ में विचारधारा का परिवर्तन होना है ।जिसका दंश बेटियों के लिए कष्टदायक बन गया है।

अतः वर पक्ष से यही निवेदन है कि दहेज को अपना अधिकार न समझें अपितु दहेज प्रथा को समझते हुए एक बेटी का सम्मान करें और एक बेटी को यथासंभव सुख सुविधाएँ देने का प्रयास करें ताकि उसे दूसरा घर दूसरा न लगे बल्कि उसे अपना घर लगे।जहाँ वो अपना सम्पूर्ण जीवन व्यतीत कर सके।

मुझे उम्मीद है कि आप दहेज प्रथा का वास्तविक अर्थ समझ गये होंगे।

लेखक अमित चन्द्रवंशी

यह भी पढ़े :

आजकल के बच्चे(Modern Poem)

ढोंगी साधु(कविता)

होली (कविता)

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s