दीपावली प्रतीक है…

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प्रभु श्री रामचंद्र जी के आने से पूर्व ही जिस प्रकार अयोध्या नगरी दीपों की शृंखला से प्रकाशित हो उठी थी

और आसमान श्री रामचंद्र जी के दर्शन से प्रकाशित हो उठा था। उस प्रकाश का रहस्य अद्भुत है।जिसे अमित चन्द्रवंशी अपनी बुद्धि अनुसार प्रस्तुत कर रहा है ।
धाकड़ अमित दोहा
प्रभु प्रताप अबखानीय , के विधि बरनहि जाय।
सुमिरहि प्रभु पद बरनउँ,जो ‘अमित‘ बुद्धि पाय॥

दीपावली प्रतीक है उन प्रज्वलित दीपों की शृंखला का जिस को प्रभु श्री रामचंद्र जी ने जारी रखा और उसे कभी नहीं तोड़ा।अर्थात्

रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्रान जाहुँ बरु बचनु न जाई ॥ ( रामचरितमानस 2.27.4)
अपने पूर्वजों के आदर्शों पर चलते हुए मर्यादा पुरोषोत्तम श्री रामचंद्र जी ने सभी वचनों को मर्यादा से निभाया और रघुकुल की रीत को निभाते हुए उसे सदा प्रकाशवान करते रहे।
वन में जाकर मुनिजनों को दुख देने वाले दानवों को मारकर उनको सुखी किया और धर्म का दीपक सदा प्रकावान रखा।
बारह वर्षों तक मुनिजनों के साथ रहकर माता सीता और सुमित्रानंदन सहित मुनियों की सेवा की और वेद-पुराणों का ज्ञान लिया।और इस प्रकार मुनियों को राक्षसों के भय से हीन करते हुए ज्ञान के दीपक को प्रज्वलित करते हुए आगे अग्रसर हुए ।

सुग्रीव से मित्रता कर और बाली जैसे धर्म से भटके हुए व भ्रमित वानर का वध करके मित्रता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए और उसे प्रज्वलित करके एक नई ज्योत प्रकाशित की ।
तत्पश्चात राम जी ने श्रापितों को श्राप मुक्त करते हुए रावण सहित उसके परिवार को परम धाम देकर धर्म का दीपक प्रकाशवान बनाये रखा।
माता सीता रूपी छवि जो लंका में 14 मास 10 दिन तक रही, उससे अग्नि परीक्षा लेकर धर्म शास्त्र का प्रमाण देते हुए सिद्ध किया कि माता सीता (छवि रूप) इतने समय तक लंका में कैसे पवित्र रही और पतिव्रता शक्ति को दर्शाकर धर्म की अलख ज्योत जलाई।
श्री राम जी ने दीपक की उस ज्योति को सदा प्रकाशवान रखा जिसके लिए भरत जी तप करते हुए चौदह वर्ष पश्चात् अपने भाई से मिलने का तप कर रहे थे और अयोध्यावासियों को उनके नयनों के तारे को दर्शन देने की लालसा के दीप को सदा प्रकाशवान रखा।
प्रभु श्री रामचंद्र जी ने वानरों और रीछों को अपने साथ लेकर उस अद्भुत शक्ति की ज्योति को जगाया जिसने हनुमानजी जैसे वानर को महान बना दिया और हनुमानजी ने राम नाम को महान बना दिया।जिसने नाम के महत्व को चरितार्थ कर दिया ।

दीपावली प्रतीक है उन दीपों के प्रकाश का जिसने वन में रह रहे ऋषि-मुनियों के दुःखों को दूर किया और उनके मुखों को प्रकाशित किया।
दीपावली प्रतीक है भरत और अयोध्यावासियों के तप का जिसने सभी का मुख प्रकाशित किया।
दीपावली प्रतीक है ऐसे ही अनंत फलों को देने वाले प्रकाश की।
अमित चन्द्रवंशी की ओर से आप सभी को दीपावली के पावन अवसर पर कोटि-कोटि शुभकामनाएँ…
द्वाराअमित चन्द्रवंशी

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