योग (कविता)

योग पर विशेष 


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धाकड़ अमित का भोपाली अंदाज

:

मुक्तक

बिन खर्चे एक रुपिया ।

कह  दो तुम  शुक्रिया ॥

योग से मिटे सब रोग,

तो तू क्यों न कर रिया॥

कविता :

न होगा कोई रोग।

सकोगे सब सुख भोग॥

खुश रहेंगे सब लोग।

जो होगा रोज योग॥

रहेगी जो सदा ताजगी।

न होगी दवाई दिवानगी॥

डाॅक्टर से भी रहोगे दूर।

उम्र भी बढ़ेगी भरपूर॥

बढ़ेगी शारीरिक क्षमता।

दिखेगी मानसिक दक्षता॥

थकान न कभी सतायेगी।

तंदरुस्ती सदा पास आयेगी॥

कविअमित चन्द्रवंशी

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