नव वर्ष संदेश

image

नया वर्ष शुरू हो गया है और क्या आप हर बार यूँ ही नव वर्ष मनाओगे? 
   मैं आपको मात्र विक्रम संवत् २०७२ के नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ ही दे सकता हूँ क्योंकि बधाई तो तब देता जब नव वर्ष की शुरुआत बड़े ही उत्तम ढंग से हुई होती ।परन्तु नव चेतना, नव उल्लास, नव समय इत्यादि को लाने वाला जब असमय ही ओलावृष्टि के साथ कष्टदायक पीड़ा को लेकर आगमन करे तब कदाचित आप इसे सुखद नहीं कह सकते । नव वर्ष सदैव खुशियों को लाने वाला है पर उसके रंग में भंग उत्पन्न करके आपने सारा स्वरूप बिगाड़ दिया है । अब जिम्मेदारी आपकी ही है कि इस शुभ अवसर पर संकल्प लें और इस संसार के विनाश के कारकों को ठीक उसी प्रकार निकाल फेंकिए जिस प्रकार एक तपस्वी संसार की मोह माया को निकाल फेंकता है । 
      आपके पापों का फल अकेले अन्नदाता ही को क्यों चुकाना पड़े । आप पर तो ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा परंतु जिसने दिन रात मेहनत की है उसके हृदय का हाल तो पूछिए, मानो मंदराचल के शिखर से उसके उर को विदीर्ण कर दिया गया हो । लेकिन अभी नहीं तो शीघ्र ही आपको इसका परिणाम भुगतना होगा । प्रदुषण को बढ़ाने के आप वो सारे कृत कर रहे हो जिन्हे आप को नहीं करना चाहिए था बल्कि आप को वृक्षों को अधिक से अधिक संख्या में लगाना चाहिए था पर आप तो इसके विपरीत कर्म कर रहे हो।

बिन मौसम मौसमों का मजा लीजिए,
और यूँ ही प्रदुषण में बढोतरी कीजिए ।
वो दिन दूर नहीं जब खाने पीने को कुछ न होगा,
बस मौत से पहले ही दफन होने की अपनी मंजूरी दीजिए॥

   माता तो दयालु होती है और उसकी ममता भी अबखानीय है। धरती माँ स्वयं अनेक कष्ट उठा लेंगी पर अपनी संतानों पर कभी कष्ट नहीं आने देंगी ।
     धरती माता अपने आंचल से बार बार बचाने का प्रयास कर रहीं हैं परन्तु उनकी जिद्दी और नासमझ संतान बार बार अपनी माता के प्रकृति के आंचल को हटाता जा रहा है । माता तो ये सब सहन कर लेगी पर उनके हितैषी ये सब सहन कैसे कर लेंगे ।
   अपनी बहन को कष्ट में देखकर भला वरुण देव कैसे शांत रहेंगे उनकी आंखों से बहते आंसू ही असमय होने वाली बारिश है, अपार पीड़ा के कारण मुख से निकलने वाली पवन देव की ठंडी साँसें हीं असमय चलने वाली शीत लहर है, भयंकर क्रोध से बेसुध हुए ऋतु निर्धारण कर्ता सूर्यदेव के मुख मंडल से निकालने वाला ताप ही असह्य गर्मी का कारण है। इसी प्रकार अन्य देवों की पीड़ा के कारण असमय ही हमे कष्ट का भोगी होना पड़ रहा है । यदि हम सही समय पर सजग नहीं हुए थे हमे असमय ही काल का विकराल एवम् अविचारनीय भयंकर रूप देखना पड़ेगा ।
     पुनः मैं आपको तीस अवयव, बारह अंश, चौबीस पर्व और तीन सौ साठ अक्षरों वाले अर्थात् चौबीस पक्षों वाला, छः ऋतुओं वाला, बारह महीनों वाला तथा तीन सौ साठ दिनों वाले विक्रम संवत 2072 को मंगलकामना से युक्त करके आपको अर्पित करना चाहता हूँ।
     मैं चाहता हूँ कि आप नव वर्ष को उत्तम बनायें। जिसे मैं आपको मात्र मेरे एक छंद से कह देना चाहता हूँ-
नव लय नव वलय नव निश्चय तय करें।
वलय उत्तम लय निश्चय सब सुखमय करें॥
नव उमंग नव तरंग नव विविध रंग हों।
न दुख से न कष्ट से न जिंदगी से जंग हों॥
अमित‘ रहे नहीं कोई कमी होवे नाश सकल कमियाँ ।
पाप राह पर चलती नहीं मिले खोई दुनियाँ ॥

इन्ही शुभकामनाओं के साथ आपका अमित चन्द्रवंशी
    

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s