होली कविता (अमित आज तू लोगों को. ..)

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अमित आज तू लोगों को , रंग कैसे लगा पायेगा।
जो रंग तू लेकर आयेगा , वही लेकर लौट जायेगा ॥

अपने सच्चे हितैषियों को , रंग तू कैसे लगायेगा ।
लम्बे अरसे से जो न मिला, अब उनसे नजर कैसे मिलायेगा॥
तू उनके चेहरे की वजह, अपना चेहरा गुलाबी पायेगा ॥1॥

अमित आज तू लोगों को , रंग कैसे लगा पायेगा।
जो रंग तू लेकर आयेगा , वही लेकर लौट जायेगा ॥

कपट मन में रखने वालों को, अमित तेरा रंग कैसे सुहायेगा।
रंग भी अपना रंग भूलेगा, रंग बदनाम हो जायेगा॥
हर रंग काला हो जायेगा, वो अपना स्वरूप बदला पायेगा॥2॥

अमित आज तू लोगों को , रंग कैसे लगा पायेगा।
जो रंग तू लेकर आयेगा , वही लेकर लौट जायेगा ॥

जिनकी जिंदगी में केवल गम, उन्हे कैसा रंग लायेगा।
जो भी रंग लगेगा उनपे, आँसू में वो धूल जायेगा॥
सारे रंग होकर भी उनको, एक ही रंग नजर आयेगा॥3॥

अमित आज तू लोगों को , रंग कैसे लगा पायेगा।
जो रंग तू लेकर आयेगा , वही लेकर लौट जायेगा ॥

रंग बिरंगी दुनिया का, खुद अपना ही रंग पायेगा ।
प्रदूषण से बदले जहाँ को, किस रंग से तू सजायेगा॥
आसमान भी है अब काला, किस किसको तू रंग से रंग पायेगा ॥4॥

अमित आज तू लोगों को , रंग कैसे लगा पायेगा।
जो रंग तू लेकर आयेगा , वही लेकर लौट जायेगा ॥

नेता को तो पहले से ही, कई रंगों में तू पायेगा।
जो रंग तू उन्हे लगायेगा, वो भ्रष्ट होकर बदल जायेगा॥
रंग भी उनकी चाल में फंस के, उनके रंग में ही ढल जायेगा॥5॥

अमित आज तू लोगों को , रंग कैसे लगा पायेगा।
जो रंग तू लेकर आयेगा , वही लेकर लौट जायेगा ॥

रचयिता – अमित चन्द्रवंशी

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