साधु नाम आज उसका पड़ा (कविता)

साधु

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साधु नाम आज उसका पड़ा ।
जिसका ढोंग आज सबसे बड़ा ॥

बढ़ा के दाढी बना के जटा ,
लगा तिलक और भगवा कपड़ा।

हाथ कमंडल और एक माला ,
कह के ईश्वर तू द्वार खड़ा ।

जिसने देखा वेश ऐसा जो ,
वो जरुर चक्कर में पड़ा ।

वेशभूषा केवल है पहचान ,
फितरत कुदरत को न पकड़ा।

कहे ‘अमित‘ दुनिया के जाल,
दो तुम इन सबको झट झड़ा ।

कवि – अमित चन्द्रवंशी

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