हनुमानजी की पूँछ में आग क्यों नहीं लगी?

हनुमानजी की पूँछ में आग क्यों नहीं लगी?

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प्रायः इस प्रश्न के उत्तर को पाने के लिए आपने अवश्य ही इधर उधर सिर मारा होगा या फिर आपने इस बात पर ध्यान ही नही दिया होगा।

परन्तु आज हम इस प्रश्न का उत्तर आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।

जब माता सीता को इस बात की खबर मिली कि हनुमान जी की पूँछ में आग लग गई है। तब उस समय पवित्रहृदया सीता जी हनुमानजी के लिए मंगल कामना करती हुई अग्निदेव की उपासना में संलग्न हो गईं और इस प्रकार बोलीं-“अग्निदेव! यदि मैंने पति की सेवा की है और यदि मुझ में कुछ भी तपस्या तथा पातिव्रत्यका बल है तो तुम हनुमान के लिए शीतल हो जाओ।

“यदि बुद्धिमान भगवान श्री राम के मन में मेरे प्रति किंचिन्मात्र भी दया है अथवा यदि मेरा सौभाग्य शेष है तो तुम हनुमान के लिए शीतल हो जाओ।

“यदि धर्मात्मा श्रीरघुनाथजी मुझे सदाचार से सम्पन्न और अपने से मिलने के लिए उत्सुक जानते हैं तो तुम हनुमान के लिए शीतल हो जाओ ।

” यदि सत्यप्रतिज्ञ आर्य सुग्रीव इस दुख के महासागर से मेरा उद्धार कर सकें तो तुम हनुमान के लिए शीतल हो जाओ । “

मृगनयनी सीता के इस प्रकार प्रार्थना करने पर तीखी लपटों वाले अग्निदेव मानो उन्हे हनुमान के मंगल की सूचना देते हुए शांतभाव से जलने लगे।उनकी शिखा प्रदक्षिणभावसे उठने लगी।

हनुमान जी के पिता वायुदेवता भी उनकी पूँछ में लगी हुई आग से युक्त हो बर्फीली हवा के समान शीतल और देवी सीता के लिए स्वास्थ्यकारी(सुखद)होकर बहने लगे।
[वाल्मीकि रामायण 4.53.25-32]

इस प्रकार अग्नि प्रज्वलित होते हुए भी पवनपुत्र हनुमानजी की पूँछ में आग नहीं लगा सकी।

द्वारा – अमित चन्द्रवंशी

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